August 4, 2020

प्यार एक एहसास , जीवन की डोर …..

जादू मौजूद है ,जब वर्षा और खिले हुए फूल , हवाओं का संगीत और सितारों की खामोशी होती है, तो कौन संदेह कर सकता है? जिसने भी प्यार किया है उसे जादू ने छुआ है। यह हमारे जीवन का इतना सरल और असाधारण हिस्सा है।

प्यार निस्संदेह सबसे अच्छी भावनाओं में से एक है जो एक व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी अनुभव कर सकता है। यह मजबूत भावना एक थकी हुई आत्मा का उत्थान कर सकती है, और उन लोगों को भी खुशी और आशा दे सकती है जो पहले से ही खुद पर विश्वास खोने लगे हैं। यह वह अद्भुत भावना है जो आपको बेहद खुश और उत्साहित करती है और आपको चीजों के सपने देखना शुरू करना चाहती है, जैसे हमेशा के लिए और बाद में खुश।

प्यार वह चीज है जिसे आप परियों की कहानियों में पढ़ते हैं और चाहते हैं कि यह आपके जीवन में भी हो। यह आपके प्रिंस चार्मिंग या मिस राइट को खोजने और उस व्यक्ति के साथ पूरी अनंत काल बिताने के बारे में है जिसने आपके दिल को छू लिया है। प्यार एक ऐसी चीज है जो दुनिया को गोल कर देता है ,प्यार जिंदगी को को और अधिक मजेदार और सुखद बनाता है। और कुछ लोगों के लिए, प्यार बस वह जादुई एहसास है जो आपको एक पूरी तरह से अलग दायरे में ले जाता है, जहां केवल आप और आपका कोई खास ही मौजूद होता है।

वैसे तो प्यार एक बहुत ही अच्छा एहसास है लेकिन आज के समय में बहुत सारे लोग ऐसे भी है जो प्यार के नाम पर सिर्फ अपना मतलब निकालते है , इसीलिए लोंगो को प्यार से भरोसा उठता जा रहा है लेकिन यकीन मानिये अगर प्यार मौजूद नहीं होता तो ये दुनिया भी नहीं होता ,तो दोस्तों आइये जानते है की असल में प्यार क्या है। ….

सिर्फ प्यार ही एक ऐसी स्टेट है जिसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है , बाकि इस दुनिया में हर इमोशन का हर फीलिंग का हर थाट का साइड इफ़ेक्ट है। सिर्फ प्यार ही ऐसा है जिससे आप एक्चुअल में प्रेजेंट मोमेंट में आ सकते हो जब आप पूरी तरह से ठहर जाते हो ,सिर्फ प्यार ही ऐसा कुछ है जहा आप बिलकुल खो जाते हो। प्यार आपको मतलबी कभी नहीं बनाता है प्यार तो वो एहसास है जिसमे आप खुद को भूलकर कही और खो जाते हो। इसके पीछे भी वजह होता है जैसे की बाहर आपने कुछ ऐसा देखा जिसके लिए आपको बहुत स्ट्रांग डिजायर है तो जैसे ही वो आपके सामने आता है तो आपकी बोलती बंद हो जाती है वो भी सिर्फ कुछ देर के लिए लेकिन जैसे ही उसकी असलियत सामने आती है तब दिमाग में आता है ये तो बेकार चीज है। उदहारण के लिए मानलो कोई एक्ट्रेस है जो आपको बहुत पसंद है जैसे ही वो आपके सामने आएगी तो आप सोचो थोड़े देर के आपकी बोलती बंद नहीं हो जाएगी आप थोड़े देर के लिए खुश हो जाओगे, यह भी एक प्रकार का प्यार है लेकिन ये बहुत ही अस्थायी है। आप समझिये की यहां क्या प्रॉब्लम है की आप बाहरी रूप से किसी और पे डिपेंड हो गए। जैसे की सुंदरता उसकी सुंदरता आपको खींचती है आप के दिमाग पर एक तरह से कुछ देर के लिए कब्ज़ा कर लेती है आपको बिलकुल मोहित कर देती है आपको पूरी तरह से अपने बस में कर लेती है , तो इसको आप अस्थाई प्यार बोल सकते हो क्युकी ये प्यार आपके अंदर से नहीं आ रहा है बल्कि बाहर से किसी की सुंदरता के कारन कुछ देर के लिए आपके दिमाग पर हावी हो जाता है। आप इसको आकर्षण बोल सकते हो जो की प्यार नहीं है क्युकी ये सब अस्थायी है।

तो हम समझते है की तब प्यार क्या है

इसकी शुरुआत होती है खुद से मतलब की अपने खुद के सच को देखना शुरू कर दिया है ,बिना खुद के सच को देखे बिना प्यार हो ही नहीं सकता , जब आप ये महसूस करने लग जाते हो की जो मेरी आत्मा है वही उसकी भी आत्मा है जिससे आप प्यार करते हो इसलिए अपनी आत्मा को महसूस करना सबसे पहले जरुरी होता है। क्युकी प्यार में कुछ भी मेरा तेरा नहीं होता है ,जहा मेरा तेरा होने लगा फिर वहा प्यार कैसे हो सकता है , इसलिए आपस में ऐसे जुड़ गए है जहा की अलग होने कोई गुंजाईश ही नहीं है।

उदहारण के लिए मान लीजिये लहर पानी से अलग कैसे होगी ,है कोई तरीका उनको अलग करने का अगर है तो इन दोनों को अलग करके दिखाओ। जब आप अपनी आत्मा को देखते हैं अपनी आत्मा मतलब आप खुद ,जब आप खुद की सारी परतों को हटा लेते हो एक एक करके और आप खुद को देख लेते हो की वास्तव में आप क्या हो और आपको कही कोई अलगाव नजर नहीं आता तब आप खुद प्यार ही हो। तब आपको किसीको प्यार करने की जरूरत नहीं पड़ेगा वह प्यार अपने आप होगा। अब जब भी आप अपने जीवनसाथी को देख रहे हो तब ऐसा नहीं लगेगा की आप उसको देख रहे हो आपको लगेगा की आप खुद को ही देख रहे हो और आपको जैसे खुदसे प्यार है सामने वाले के लिए भी वही प्यार है।

माँ के केस में प्यार ऐसा ही होता है उसमे कुछ भी तेरा मेरा नहीं होता है क्युकी कोई भी बच्चा माँ से ही जन्म लेता है , माँ बोलती तो है की ये मेरा बच्चा है वास्तव में माँ की लिए उसका बच्चा मैं ही हूँ बल्कि मेरे से भी ज्यादा वो मेरा है कोई भी माँ ये सोचती है की मुझे कुछ भी हो जाये लेकिन मेरे बच्चे को कुछ नहीं होना चाहिए। इसका क्या मतलब हुआ की माँ को बच्चे से प्यार नहीं करना पड़ रहा है माँ को बच्चे से प्यार है।

जब भी अगर आपको प्यार करना पड़ रहा है तब आप गिरते हो और ऐसा बोला भी जाता है you fall in love ‘.इसलिए जब भी प्यार होता है तब आपको अपने अलग अलग चेहरे नजर आ रहे होते है ,आपके जीवन का हर छड़ रोमांचित होता है आप जीवन से ऊब नहीं सकते हो आप सालों बाद भी अगर अपने जीवनसाथी को देख रहे होंगे तो ऐसा लगेगा की पहली बार देख रहे हो क्युकी आप अपनी जीवनसाथी को नहीं बल्कि उसमे खुद को देख रहे होते हो अपना ही एक और रूप को देख रहे होते हो तो आप उसको देख कर हमेशा उत्साहित रहते हो। सामने वाले को इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा की आप उससे किस हद तक प्यार है बस उसको अच्छा लगेगा क्युकी उसको आपका कम्पलीट अटेंशन मिल रहा होता है।

प्यार अस्थाई भावना नहीं है।कभी-कभी भावनाओं मे रोज परिवर्तन हो सकता है । लेकिन सच्चा प्यार बिना शर्त हमेशा के लिए होता है।